Saturday, 5 January 2013

परम पूज्यनीय माननीय श्री मोहन जी भागवत जी का वक्तव एकदम सटीक !..........असली बीमारी की जड़ में पहुचने की है आवश्यकता !

बलात्कार  की घटनायों  पर पिछले  कई दिनों  से अजीब -अजीब  तर्क  सामने आ रहे है ! कोई बलात्कारियों  को फांसी तो कोई नपुंसक  बनाने का सुझाव  दे रहा है     ! हैरानी कि बात तो ये है कि देश के  गणमान्य  चिन्तक , सामाजिक ,अधात्मिक, राजनैतिक सभी के सभी  बलात्कार  होने के बाद  का इलाज कैसे  हो इस तरफ ही विचार करने  में  मगन हैं ! बलात्कार  होने  से कैसे रोका जाये  और ये कैसे  और क्यों  हो रहे है ? इस तरफ़ किसी का ध्यान नहीं   है या देना  नहीं चाहते हैं ?....
                                                                                                                                                                                                          आज माननीय  भगवत जी का वक्तव  सारी बीमारी  की जड़ की और इशारा  कर रहा है ! भारत  और इंडिया  की तुलना  करके उन्होंने  सब कुछ स्पष्ट  कर दिया कि इन वहशी  अपराधो  का  मुख्य कारण  भारतीय संस्कृति को भुलाकर  पाश्चात्य  संस्कृति  का अंधाधुंध  अनुसरण है !  लेकिन  इस वक्तव  के विरोध  में टीवी  के सामने  कुछ  तथाकथित  स्वम्भू  नेता या समाजशास्त्री  चिल्ला  कर  वास्तविक  समस्या  से ध्यान  हटाने  कि कोशिश  कर रहे है ! ..................................जब  से  भारतीय  सभ्यता और संस्कृति के मूल्यों  को दरकिनार करके पाश्चात्य संस्कृति  का तड़का  लगाकर  अंग्रेजी  शिक्षा  का पुरजोर  प्रचार -प्रसार सभी  सरकारी व्  गैर - सरकारी  स्कूलों  में शुरू हुआ  है ........................ ..... जब से फिल्मो  व् टीवी  व् संचार  के अन्यो  साधनों  में अश्लीलता  को फैशन  बनाकर  परोसना  शुरू किया है व् देश कि तकदीर लिखने वाले कर्णधार शासक चुपचाप  तमाशा [ जानकर - या अनजाने में  ] देख  रहे हैं !.................................. जब से बड़े सार्वजानिक  पदों  पर  नारायण दत्त  तिवारी , शशि थरूर , अभिषेक  मनु  सिंघवी , तंदूर काण्ड  के सरक्षक  जैसे  अनेको  लोगो को  बैठाया  जाने लगा  है! ......................... और जब  से  देश  कि तकदीर  लिखने  कि जिम्मेवारी  विदेशी  लोगो [ पाश्चात्य  संस्कृति  के ब्रांड  अम्बेसडर ] के हाथ  में आयी  है , तभी  से  एक से बढ कर एक  जघन्य  आपराध  करने  कि चेष्ठा व् जुर्रत  समाज में  पनपने  लगी है !
                          बहुत  सारी ऐसी  बाते  है जिनके  लागू  करने से  ऐसी घटनाओं  में कमी लाई  जा  सकती है जिनमे  प्रमुख  तौर पर चार  मुख्य  बिंदु  है .........
                           1  छात्रों  के लिए  सभी  सरकारी व्  गैर  सरकारी  स्कूलों , कॉलेज , यूनिवर्सिटी  में एक  सामान  पाठ्यक्रम  [ भारतीय  संस्कृति  के जानकार विद्ववान  लोगो  के द्वारा तैयार  करके ]  व्  सामान  पहनावा [ड्रेस ]
                            2 .अश्लीलता  परोशने  वाले सभी  संचार के साधनों  पर तुरंत प्रभाव  से प्रतिबंध !
                           3 . अपराधी  को व् उसको  प्रत्यक्ष -अप्रत्यक्ष  मदद करने वाले नेताओं , पुलिस कर्मी  या अन्य लोगो  को जल्द से जल्द कड़ी  से कड़ी सजा !
                           4 .सरकार  द्वारा व्यापक  तौर  पर भारतीय  सभ्यता , संस्कृति  के प्रचार - प्रसार  करना  व् करने वाले लोगो ,समूहों , संस्थायों  को प्रोत्साहित  करना !