पिछले दिनों ब्रिटिश राजघराने से प्रिंस विलियम व उनकी पत्नी केट मिडल्टन जिनको मिडिया ने ब्रिटिश शाही जोड़ा करके प्रमुखता से छापा भारत आये और देश के कई जगह होकर गए हैं ! ....ठीक है, मेहमान थे और मेहमान का स्वागत भी होना चाहिए ! लेकिन जिस तरह से मिडिया व देश की प्रमुख हस्तियों ने उनके स्वागत करने व मिलने में व्यग्रता और उत्सुकता दिखाई वो वाकई सोचने पर मजबूर व हैरान करने वाली बात थी ?
हमारे देश की प्रमुख हस्तियों का यह हाल था कि कोई उनको क्रिकेट की गेंद फेंककर के अपने आपको गौरवांवित महसूस कर रहा था ,तो कोई विकेटकीपिंग करके अपने को धन्य समझ रहा था! ब्रिटिश राजघराने की इस जोड़ी के भारत आगमन पर ब्रिटिश हाई कमीशन ने दिल्ली में चाय समागम आयोजित किया था, जिसमें 500 के लगभग गणमान्य अतिथियों को दोपहर की चाय पर अपने प्रांगण में आमंत्रित किया था ! आमंत्रित की सूची में कई कैबिनेट मंत्री ,जयपुर का राजपरिवार, महाराज गज सिंह, उदयपुर का शाही परिवार ,एम जे अकबर, करन थापर इत्यादि व वरिष्ठ सांसद भी शामिल थे !हाई कमीशन के गार्डन में चाय पानी की व्यवस्था थी एक ओर जहां झुलसती गर्मी में मेहमान परेशान थे तो शाही जोड़ा मुश्किल से 10 मिनट के लिए मेहमानों से मिलने बाहर आया ! सिर्फ 10-20 अति विशिष्ट लोगों को ही रॉयल कपल से मिलने अंदर कमरे में भेजा गया !एक पूर्व विदेश मंत्री इस जोड़े के साथ अपनी सेल्फी लेना चाहते थे सूत्रों का दावा है कि जैसे ही वह महोदय सेल्फी लेने की कोशिश कर रहे थे प्रिंस और केट की सुरक्षा में तैनात उनके अंगरक्षक फौरन हरकत में आ गए और एक तरीके से उन्होंने बल प्रयोग कर दिया ! सूत्र तो बताते हैं क़ि एक कश्मीर के राजघराने की हस्ती का का परिचय ब्रिटिश हाई कमिश्नर ने कांग्रेस के राज्यसभा सांसद के तौर पर कराया तो उनको यह परिचय इतना काफी नहीं लगा ! वह चाहते थे कि प्रिंस विलियम को यह बताया जाए कि वह कश्मीर के राजा रह चुके है !
मिडिया ने भी इस जोड़े के प्रचार प्रसार में दिन रात एक कर दिया !प्रिंस विलियम्स ने क्या पहना है? राजकुमारी केट मिडलटन की क्या ड्रेस है? उसने क्या गहने पहने हैं ?,इतनी छोटी छोटी चीजों को बढ़ा चढ़ाकर के प्रस्तुत किया यह सब बातें हैरान करने वाली थी और बार-बार इस जोड़े को मीडिया शाही घराने- शाही घराने की जोड़ी कहकर प्रचारित कर रही थी ! ब्रिटिश के लोगो की मानसिकता का तो पता नहीं लेकिन जंहा तक मेरी समझ है भारतीय इस जोड़ी को ब्रिटिश खानदान के रूप में तो स्वीकार कर सकती है लेकिन ये शाही खानदान के रूप में हमें स्वीकार्य नहीं ! शाही खानदान का भारतीय परिवेश में अलग परिभाषा है ! मेरा इरादा किसी के व्यक्तिगत जीवन में झांकना या किसी की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाना नहीं है लेकिन जो परिवार कभी संस्कारो में रहा ही न हो, जंहा रोजाना नए-2 सेक्स स्कैंडल होते हो, जंहा नित नये शादी और तलाक होते हों , तो उन्हें शाही खानदान कैसे माना जा सकता है? यंहा ये भी उल्लेखनीय है कि प्रिंस विलियम की माँ डायना की जब दुखद एक्सिडेंट में मृत्यु हुई थी तो वो अपने पति नहीं अपितु नए प्रेमी जिस के साथ वो शादी करना चाहती थी , के साथ सफ़र कर रही थी !
हाँ , यदि ये जोड़ा भारतवर्ष के किसी मित्र देश ( जिस देश ने भारत के साथ जमकर मित्रता निभा रक्खी होती ) से आया हुआ होता , और फिर उनका हमारी ये हस्तियां इतनी व्यग्रता से स्वागत करती तो बात समझ में आती ! लेकिन जिस देश ने हमको गुलाम बनाकर हमारा शोषण किया, जिस देश ने हमारे देश की आर्थिक सम्पदा का दोहन किया,जिस देश के शासनतंत्र को उखाड़ फैकने के लिए हजारो-लाखों लोगो ने अपनी जान की बाजी लगाई हो, देशभक्तों ने खून बहाया हो उस देश के अय्याश खानदान के चूजों के लिए इतना उतावला पन ,क्या ये मानसिक दिवालियापन नहीं है ? क्या ये शहीदों का अपमान नहीं है ?
हमारे देश में एक से एक सुंदर ,योग्य युवक,युवतियां है जिन्होंने अपने कठिन परिश्रम से देश का नाम ऊँचा किया है, नित -रोजरोज देश के लिए दुश्मनों से मोर्चा लेते हुए जवान शहीद हो रहे है , देश का किसान, मजदूर, कर्मचारी, व्यापारी आदि दिन -रात मेहनत कर देश को तरक्की पर ले जाने की कोशिश कर रहे है , ये महान हस्तियां उनके प्रति इतना उतावला पैन क्यों नहीं दिखाती ?
~~~~~~~संभलो दोस्त, संभलो !~~~~~~~~~
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