Saturday, 9 April 2016
जाट आरक्षण आंदोलन :- ये माजरा क्या था ?
"हमारा हरा-भरा हरियाणा प्रदेश जिसकी पहचान देश और दुनिया में कर्म करने और फल की इच्छा न करने का संदेश देने वाली गीता-स्थली, जात- पात व छुआछात व अंधविश्वास के खिलाफ खड़े हुए आर्य समाज के गढ़,शानदार खिलाड़ी,सैनिक और उच्च कोटि का अन्न पैदा करने वाले राज्य की रही है और जो प्रदेश शान्ति और भाई-चारे का सोहार्द बनाए रखने के मामले में सारे राष्ट्र के सामने रोल मॉडल रहा हो फिर यदि जिस प्रदेश का नामकरण भी किसी जाति,क्षेत्र,वर्ग या फिर किसी भागौलिक आधार पर न होकर स्वम् भगवान् श्री हरि के आगमन (हरि का आना=हरियाणा) पर हुआ हो उस प्रदेश में एकदम जातीय आधार पर आरक्षण मांग रहे जाट आंदोलन के दौरान घटित हुई हिंसा, आगजनी,हत्या,लूट-पाट,तोड़-फोड़,जातीय विद्वेष व दंगो ने देश और दुनिया को झकझोर कर रख दिया !ऐसा लगा मानो शांतिप्रिय हरियाणा प्रदेश जैसे युद्ध के मैदान में तब्दील हो गया हो !ऐसा भयानक मंजर लगभग एक सप्ताह तक देखने को मिला! सड़के रूक गई,रेलें ठहर गई,देश और प्रदेश में यात्रा कर रहे यात्री जगह-2 फंस गए,हर शख्स की आंखों में एक अजीब सा खौफ पैदा हो गया! लगभग एक सप्ताह तक सारा प्रदेश बंधक सा बन कर रह गया !अचानक ऐसा क्या हुआ ये किसी की समझ में कुछ नहीं आया ?
जगह-जगह पेड़ काटकर ट्रेलिया लगाकर,ट्रक लगा कर, रास्ते खोदकर सभी सामान्य आवा जाही वाले रास्तों पर जाट युवाओं के, वृद्धों के ,महिलाओं के झुंड के झुंड नजर आने लगे!फिर रह-रह कर सोशल मीडिया,टेलीविजन और समाचार पत्रों पर बार-बार,जगह -जगह से गोली चलने,हत्या आगजनी ,मारपीट,लूट-खसोट व विभिन्न जातियो द्वारा एक दूसरे खिलाफ मोर्चे निकालने की खबरों का क्रम शुरू हुआ ! नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं,वकीलों ,शिक्षकों आमजन व और तो और कुछ बुद्धिजीवी वर्ग द्वारा भी एक दूसरे की जातियों की कमियां निकालने का काम शुरू हो गया ! ये एकदम भयावह स्तिथि थी !आंदोलन कारियों की भीड़ बढ़ती जा रही थी स्थिति को संभालने के लिए सेना और अर्ध- सैनिकों बलों की टुकड़ियों को बुलाना पड़ा !
सरकार खासकर मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने तुरंत सयंम व समझदारी का परिचय देते हुए व प्रदेश के मुखिया का असली किरदार निभाते हुए वार्ता के लिए जाट आंदोलन से जुड़े सभी नेताओं व् प्रतिनिधियों को समाधान के लिए मुख्यमंत्री आवास पर बुलाया !बातचीत सद्भावना पूर्ण माहौल में संपन्न हुई ! सरकार ने सर्वमान्य हल निकालते हुए जाटों की मांग का सर्वसम्मत हल निकाला ! वार्ता में उपस्थित सभी जाट नेताओ व प्रतिनिधियों ने भी सरकार की बात का समर्थन किया व मीडिया के सामने आंदोलन कर रहे लोगो से तुरंत आंदोलन समाप्त करने की अपील की ! यंहा इस बात का उल्लेख करना भी अत्यंत आवश्यक है कि लंबे समय से जाट आंदोलन से जुड़े रहे व मुख्यमंत्री मनोहर लाल के खिलाफ कई बार विवादित ब्यान देने वाले जाट नेता हवा सिंह सांगवान ने वार्ता बैठक के बाद सरेआम मिडिया के सामने एक हैरान करने वाला ब्यान दिया कि मैंने तो मुख्यमंत्री को भी बार्ता के दौरान बता दिया है कि अब आंदोलन हमारे हाथों से फिसल कर नए व अनजान लोगो के हाथ में जा चूका है ! लेकिन उस समय किसी का भी ध्यान हवा सिंह सांगवान की बात पर नहीं गया हालाकि बाद के घटनाक्रम में समझ आया कि वो क्या कह रहे थे ! लेकिन आंदोलन कारियों ने जाट नेताओं व सरकार की अपील ठुकरा दी व सड़कों पर जमे रहे ! इन सबके बावजूद फिर सर्वदलीय बैठक बुलाई गई,जिसमें हरियाणा प्रदेश की सभी राजनीतिक पार्टीयों के वरिष्ठ नेताओं ने भाग लिया !सभी ने सरकार के प्रयासों समर्थन किया व सभी ने (चाहे अनमने मन से ) आंदोलन को समाप्त करने की अपील करने की रस्म अदायगी की ! उस समय ऐसा लगा था कि शायदअब हालात सामान्य हो जाएंगे व आंदोलन समाप्त हो जाएगा ! लेकिन हैरान करने वाली बात ये रही कि आंदोलन समाप्त होने के बजाए आशचर्य जनक रूप से ओर तेज गति से उग्र हो गया !हिंसा ओर भी ज्यादा तेजी से फैलने लगी! जगह -जगह से आगजनी व मौतों की खबर तेजी से आने लगी !आंदोलन कर रहे जाटो की भीड़ भी अचानक बे-हताशा रूप से बढ़ने लगी !कई जिलों में कर्फ्यू लगने के बावजूद भी हिंसा जारी रही ! कई जिलों में कर्फ्यू के बावजूद हालात बिगड़ते गए व सेना और आंदोलनकारी आमने-सामने डट गए ! जातियों के टकराव जगह-जगह और तेज हो गए !सारा प्रदेश आंदोलन की गिरफ्त में आ गया! हालात इतने विस्फोटक होने लगे कि कोई भी व्यक्ति एक दूसरे की बात सुनने को तैयार ही नहीं था !ये सब कुछ इतनी तेजी से चल रहा था मानो स्क्रीन पर एक्शन से भरपूर कोई हिंदी फिल्म चल रही हो!
ये सभी की समझ से बाहर की बात थी कि जब सरकार ने जाट आंदोलन कारियों की सारी मांगें मान ही ली थी तो आंदोलन समाप्त होने की बजाए ओर अधिक उग्र कैसे हुआ !ऐसी कोनसी अदृश्य ताकत थी जो पर्दे के पीछे से प्रदेश की जनता के मध्य असहष्णुता के बीज को रोपित कर भाई- चारे और सोहार्द के माहौल में जहर भरने का षड्यंत्र रच रही थी ? यह यक्ष प्रश्न अभी तक भी बुद्धिजीवी व सामाजिक विश्लेषकों को कुछ न कुछ सोचने के लिए झकझोर रहा है ।
हालात की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने जिम्मेवार शासनतंत्र का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने प्रदेश के जाट आरक्षण आंदोलन से जुड़े हुए सभी नेताओं को वार्ता के लिए फिर से दिल्ली में बुलाया ! वार्ता में सर्वमान्य हल निकाला गया व् फिर से घोषणा की गयी क़ि हरियाणा में जाटो को आरक्षण दिया जाएगा व इसके लिए हरियाणा विधानसभा के आगामी सत्र में एक प्रस्ताव पास कराया जाएगा! वहीं दूसरी ओर जाटों को आरक्षण संविधान व कानून के दायरे में रहकर किस प्रकार से दिया जा सकता है इसके तकनीकी पहलुओं की जांच व समाधान के लिए वरिष्ट केंद्रीय मंत्री वैंकया नायडू के नेतृत्व में पांच सदस्यीय मंत्रियों की कमेटी का गठन किया!
इस लेख में मै इस बहस में नहीं पडूंगा कि जाटों की आरक्षण की मांग जायज है या नहीं ? मेरी तो इतनी सी पीड़ा है कि आंदोलन में हिंसा फैला कर प्रदेश के इतने बढ़िया सामाजिक वातावरण में जहर घोलकर जाटों को बदनाम करने का षड्यंत्र किसने रचा !लेकिन थोडा सा भी सामान्य ज्ञान रखने वाले व्यक्ति को इस आंदोलन से सम्बंधित घटनाक्रम की हर घटना स्वत ही बहुत कुछ सोचने पर मजबूर कर देती है! मैंने भी कई बार छात्र ,सामाजिक व राजनैतिक आंदोलनो में भाग लिया है व कई आंदोलनो को बडी नजदीक से देखा है !लेकिन इस आंदोलन में जिस तेजी से घटनाक्रम पर घटनाक्रम बदलते गए ,ऐसा पहले कभीे भी किसी आंदोलन में न तो देखा न सुना ! यह शुरू से ही सर्वविदित है कि हरियाणा के जाट सामान्यता अपने भोलेपन, सरल स्वभाव,हँसी -ठिठोल्ली,तुरंत हाजिर जवाबी, स्वमं की जातीयता का स्वाभिमान लेकिन दूसरी जातियोँ का सम्मान व खड़ी बोली के लिए जाने - जाते हैं !लेकिन रातों- रात उनके मन में एकदम से ऐसी कोनसी क्रान्ति की विचारधारा ने हिलोरें मारने शुरू कर दिये कि वह सड़कों पर आ कर के मरने -मारने के लिए उतारु हो गए ? दूसरों की सहायता करने में सदैव तत्पर रहने वाले,खेलों में मैडल लाकर देश का नाम रोशन करने व देश की रक्षा में अग्रणी रहने वालों कि आँखों में रातों- रात एकदम खून कैसे उत्तर आया ये एक रहस्यमयी प्रश्न है जिसकी तह तक पहुचना अति - आवश्यक व समय की मांग है ?
हालांकि पहले भी प्रदेश में वर्षों से रह- रह कर जाट आरक्षण की मांग उठती रही है! जाट समुदाय के लोगों द्वारा समय- समय पर धरने प्रदर्शन भी होते रहे है ! एकाद छुटपुट हिंसात्मक घटनाए पहलें भी घटित हुयी हैं लेकिन इन सबके बावजूद आज तक (इस आंदोलन के होने के बावजूद भी ) हरियाणा में जाट जाति का कोई भी बड़ा व ताकतवर गैर- राजनैतिक नेता नहीं बन पाया है!इसका मुख्य कारण ये है कि हरियाणा एक छोटा प्रदेश है और जाट सामान्यता प्रदेश की राजनैतिक पार्टियों में मौजूद राष्ट्रीय, प्रदेश स्तरीय व स्थानीय जाट नेताओं में आस्था के चलते अलग-2 विचारधाराओं में विभक्त रहा है,अतः गैर- राजनैतिक सर्वमान्य जाट नेता के लिये हरियाणा की धरा पर स्पेस ही नहीं है इसके बावजूद प्रदेश के अलग-अलग जिलों के जाटो की अलग- अलग ताशीर है व सामाजिक व आर्थिक जीवन में भी भारी असमानताएं है और इसकी के चलते वर्तमान आंदोलन से पहले कभी भी जाट समाज के किसी भी गैर- सामाजिक कार्यक्रम या आरक्षण के किसी भी आंदोलन,सम्मलेन या सैमीनार में 10,000 से ज्यादा जाटों की भीड़ इकट्ठी नहीं हुई !जाट समुदाय के ज्यादातर लोगों की आपस में रिश्तेदारियां भी इलाकों विशेष तक ही सीमित है ! फिर इस एकदम से आंदोलन में ऐसा क्या विशेष कारण उत्पन्न हुआ कि जिसके चलते बहुसंख्या जाट एकदम सब कुछ छोड कर आरक्षण की मांग के लिए सड़कों पर जा पहुंचे ?
मैंने इस संदर्भ में जाट व अन्य जातियों के काफी प्रबुद्धजनों से इस विषय में कई बार विस्तार से तर्क - वितर्क किये ! इस विषय में सबका अपना अपना अलग अलग नजरिया था ! किसी का मत था कि जाट समुदाय का मुख्यमंत्री प्रदेश लंबे समय से चला आ रहा था इसलिए गैर-जाट मुख्यमंत्री बनने से जाट नाराज है! किसी ने कहा की ज्यादातर जाटो की आजीविका कृषि पर आधारित है और लगातार फसलों के दाम पीट रहें है व ज्यादातर जाट छोटे किसान हैं इस कारण वे कर्ज की दलदल में फंसते जा रहे हैं इस वजह से भी जाटो में सरकार के प्रति आक्रोश है और किसी का तर्क था कि गत हुए पंचायत चुनाव में सरकार ने जो शैक्षणिक योग्यता की शर्त लगाई उस वजह से काफी सारे जाट चुनाव लड़ने से वंचित रह गए इसलिए ये सब हुआ और कई व्यक्तियों ने यह भी दलील दी कि ज्यादातर टैक्सी, जीप , ट्रक , ऑटो चलाने वाले काफी संख्या में जाट समुदाय से है और 10 साल पुराने वाहनों के बैन करने के फैसले से ये लोग नाराज है लेकिन बहुत से लोगो का ये भी कहना था चूँकि एक गैर- जाट समुदाय के सांसद ने लगभग एक साल से लगातार जाट जाति पर सार्वजानिक मंचों से कटाक्ष किये इसलिये ये सब कुछ हुआ !ये सब या इनमे से कोई एक या अन्य इस आंदोलन के सहायक कारण हो सकते हैं लेकिन इनमे से कोई भी एक कारण ऐसा नहीं है जिससे इतना बड़ा उग्र हिंसात्मक आंदोलन हो सके !अगर ये सब कारण मान भी लिए जाएँ तो इस आंदोलन को अंदरखाते किसने एकजुट करके हवा दी? जाट नेताओं के हाथ से कैसे एकदम आंदोलन निकल गया ? कैसे कांग्रेस और इनलो पार्टी के एक दूसरे के कट्टर विरोधी होने के बावजूद जाट कार्यकर्ता दलों की दीवार तोड़कर एकसाथ धरनों पर बैठ गए ? इन सब बातों का गहराई से विश्लेषण की आवश्यकता है बाकि सच्चाई इस मामले में ज्यादा देर तक छुप नहीं पाएगी देर- सबेर सामने आ ही जायेगी बल्कि कुछ तो सामने आयी भी है ! पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा के राजनितिक सलाहकार प्रो वीरेंद्र का ,पूर्व गृहमंत्री सुभाष बत्रा का एक आडियो टेप व रोशन लाल आर्य ( तीनों कांग्रेस के )का वीडियो टेप उजागर हुआ था, जिसमे वो आंदोलन बारे विवादित ब्यान देते हुए सुने गए है और प्रो वीरेंद्र तो जेल में इसी मामले रह कर बाहर जमानत पर आये है ये तो प्यादे भर है ,मास्टर माइंड ताकतों का पर्दाफाश होना तो अभी बाकी है ?
जो जाट समुदाय के लोग अपने आरक्षण के लिए आन्दोलनरत थे उनमे से ज्यादातर को तो शायद ये पता भी भी नहीं होगा कि जाने-अनजाने में वे किन शरारती,अराजक व सत्तालोलुप ताकतों के द्वारा दुरपयोग हो गए हैं? जाट समुदाय के ज्यादातर सामान्य लोग ये तो समझ भी गए है व खुले मन से स्वीकार भी करने लगे है कि लगभग 10 वर्षों तक सत्ता रहने वाली कांग्रेस और भूपेंद्र हुड्डा ने जाटों को आरक्षण के नाम पर केवल छला है!ऐन चुनाव के मौके पर इन लोगो ने जाट आरक्षण का नकली झुन-झना जाटों के हाथो में पकड़ाया था! बिना किसी आधार पर दिया ये झुन-झना सुप्रीम कोर्ट में जाते ही ताश के पतों की तरह बीखर गया ! क्या कांग्रेस ने सत्ता से जाते-जाते ये खतरनाक खेल इसी दिन के लिए तो नहीं खेला था ?
देश के साथ - साथ हरियाणा में भी भ्र्ष्टाचार रहित लोकप्रिय सरकार मनोहर लाल खट्टर के नेतृत्व में विकास के पथ पर तेजी से आगे बढ़ रही थी, सरकार के बल पर गुंडागर्दी का खेल खेलने वाले लोगो के दिन प्रदेश से लद गए हैं,प्रदेश में नोकारियों,विकास व् क्षेत्रवाद में भेदभाव व भ्र्ष्टाचार के आरोप पुराने जमाने की बातें हो चली हैं और आमजन सरकार की नीतियों से लगातार प्रभावित हो रहे थे,विपक्ष के पास काफी कोशिशो के बावजूद सरकार के खिलाफ ढ़ेड साल में कोई एक भी ठोस मुद्दा हाथ नहीं आ सका है ! पूर्व सरकारों में प्रदेश से पलायन कर गये उधोगपति वापिस लौटने व विदेशी निवेशकों ने हरियाणा में निवेश करने की रूचि दिखानी शुरू कर दी थी!इसी को लेकर मार्च के पहले सप्ताह में गुड़गांव में हरियाणा हैपनिंग का कार्यक्रम पहले से ही तय था! प्रदेश के अन्य जिलों के साथ-साथ कांग्रेस के प्रभाव वाले खरखोदा ( सोनीपत)में बहुत बड़ा निवेश होने की सहमति पहले से ही बन चुकी थी! हिंसक जाट आरक्षण आंदोलन का सच क्या है ? कंही आंदोलन की आड़ में सत्ता और वोट बैंक के भूखे लोग अपनी घिनोनी साजिशों में कामयाब तो नहीं हो गए ? देश के साथ - साथ हरियाणा में भी भ्र्ष्टाचार रहित लोकप्रिय सरकार मनोहर लाल खट्टर के नेतृत्व में विकास के पथ पर तेजी से आगे बढ़ रही थी, सरकार के बल पर गुंडागर्दी का खेल खेलने वाले लोगो के दिन प्रदेश से लद गए हैं , प्रदेश में नोकारियों,विकास व् क्षेत्रवाद में भेदभाव व भ्र्ष्टाचार के आरोप पुराने जमाने की बातें हो चली हैं और आमजन सरकार की नीतियों से लगातार प्रभावित हो जनता की लगातार सरहाना मिल रही थी ,हो सकता है ये सब भी कई विपक्षी लोगो को बहुत अट -पटा लगा हो!इसका ताजा उदहारण शेरशाह सूरी मार्ग पर स्थित मुरथल (सोनीपत ) में आंदोलन समाप्ति के तुरंत बाद मिडिया का एक विशेष वर्ग द्वारा न्यूज़ चैनेल व समाचार पत्रों में कई दिनों तक एक दर्जन महिलाओं के साथ सामूहिक बलात्कार व गैंग- रेप होने की आशंका की खबरें चलाकार समाज में सनसनी फैलाने में सक्रिय हो गया ! ये भी सरकार को बदनाम व अस्थिर करने की साजिश की कोशिश तो नहीं थी? आखीरकार सरकार के सही समय पर सही निर्णयों के चलते मिडिया के इस वर्ग का ये तमाशा भी पीपली लाइव फ़िल्म की तरह एक मजाक का ही विषय बन कर रह गया !
जाट आंदोलन के दौरान हुई हिंसा व आराजकता से हरियाणवी समाज के सौहार्द व भाईचारे को तो जबरदस्त ठेस पहुंची ही है साथ में सरकारी और निजि सम्पतियों को भी भारी नुक्सान हुआ है !कई स्थानों पर लोगो की दुकानें ,मकान व प्रतिष्ठान पूरी तरह जल कर तबाह हो चुके है,हजारों पेड़ कटे हैं , कई जिलों में जगह-जगह सड़के तोड़ दी गई,रेल की पटरियां उखाड़ दी गई,सैंकड़ों बसें,ट्रक व कारों को आग के हवाले कर जला दिया गया !30 के लगभग लोगो की जाने गयी व सैकड़ों घायल हुए !
अभी भी प्रदेश की जनता निम्नलिखित बिंदुओं को न तो समझ पा रही हैं और न ही पचा पा रही हैं ?
1.जाट आरक्षण के समर्थन में जाटो के पास कोई भी करिश्माई या बड़ा नेता नहीं था फिर अचानक से एकदम इतना बड़ा आंदोलन कैसे खड़ा हो गया ? जाट आंदोलन देश प्रदेश के किसी भी स्थान पर किसी भी जाट नेता के हाथ में नहीं था तो फिर यह आंदोलन सारे प्रदेश में एक साथ इतने सुचारु तरीके से कैसे चल रहा था,और जब सरकार ने शुरू में ही सारी मांगे मान ली थी तो फिर आंदोलन समाप्त होने की बजाए उग्र और हिंसात्मक क्यों हुआ ?
2. जब रोहतक की हिंसा के कारण हरियाणा जल रहा था उस समय कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा अपने गढ़ रहे रोहतक में हिंसा की आग शांत करने क्यों नहीं गए ? जबकि यही वो रोहतक शहर था जिसने उनके समर्थन में भारी मतदान कर तीन बार चौ देवीलाल को हराया था !और जब जाट आंदोलन समाप्ति की ओर था तब तब वो शांति और भाईचारे की अपील का स्वांग करने के लिए जंतर मंतर पर ही धरने पर क्यों बैठे,अपने गृह जिले में क्यों नहीं ? और जब उनके पूर्व राजनीतिक सलाहकार आंदोलन के षड्यंत्र में फंस गए तो ये क्यों कहा कि मेरा उनसे कोई सम्बन्ध नहीं है ?
3. हरियाणा के वित्तमंत्री कैप्टेन अभिमन्यु का मकान को आंदोलन कारियों ने किस वजह से आग लगाई?
4..आज तक हरियाणा में अनेकों बार जायज - नाजायज मांगों के समर्थन में अनेकों धरने प्रदर्शन होते रहे हैं लेकिन उनकी मांगों के खिलाफ पहले कभी -किसी भी दूसरे पक्ष या वर्ग ने मोर्चे या जलूस नहीं निकालें है तो फिर अचानक से आंदोलन के दौरान जगह -2 जाटों के खिलाफ क्रमबद्ध मोर्चे व जलूस कैसे निकले ?
5. जाट आंदोलन ठंडा होते ही एकदम से लगभग सभी न्यूज़ चैनल व समाचार पत्रों में मुरथल सोनीपत के पास लगभग एक दर्जन महिलाओं के साथ सामूहिक गैंग रेप होने की आशंका वाली झूठी खबरें कैसे छाई रही ? जबकि इस सम्बन्ध में किसी भी एक भी महिला या उसके रिश्तेदार ने न तो पुलिस में रिपोर्ट दी और न ही किसी मीडिया या अन्य को !
6. सोशल मीडिया पर अचानक कुछ मुस्लिम जाट आंदोलनकारियों की वह कुछ जाट मुस्लिमों की एकदम से प्रशंसा कैसे करने लग गए ? व मुलायम सिंह यादव के सबसे विश्वसनीय व भाजपा के धुर विरोधी कट्टर मुस्लिम नेता आजम खान का आंदोलन के समाप्त होने के बाद यह ब्यान कैसे आया कि भाजपा सरकार ने आंदोलन के दौरान जाटो पर बहुत अत्याचार किए हैं जबकि आजम खान का हरियाणा की राजनीति या यंहा के जाटो से दूर दूर का भी नाता नहीं है ?
7.. बसपा सुप्रीमो मायावती जो की सदैव अन्य जातियों के द्वारा आरक्षण मांगने खिलाफ रही है उसने एकदम से जाट आरक्षण की मांग को समर्थन क्यों दे दिया ?
यह कुछ ऐसे प्रश्न है जिनका जवाब आज हरियाणा प्रदेश का बच्चा बच्चा मांग रहा है !
समय की मांग है कि आज प्रदेश में हर जाति और वर्ग के व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन बखूबी करना होगा !सभी हिन्दू सगे भाई है और जाति से बड़ा भाईचारा है इस भावना को अपनाकर आगे चलना होगा!जाट समाज को अहसास करना होगा कि ऐसे आरक्षण का क्या लाभ जिसमें अपने ही प्रदेश के अन्य भाईयों की भावनाओं के सम्मान को ठेस पहुंची हो? गैर-जाट समाज को भी अपना मन टटोलना होगा कि कोई पाकिस्तान के लोग आंदोलन थोड़े ही कर रहे थे तो फिर हम एक दम इतने उद्धेलित कैसे हो गए? क्या अब जाट समाज को भी ठंडे दिमाग से यह सोचने की आवश्यकता नहीं है कि उनके आंदोलन की आड़ में किन-किन ताकतों ने अपने स्वार्थ की पूर्ति पूरी कर ली हैं ? क्या हरियाणा किसी एक जाति विशेष के योगदान के कारण ही इस शिखर तक पहुंच पाया है ?क्या हरियाणा के निर्माण मे, विकास में,तरक्की में व् पहचान मे सभी जातियों का किसी न किसी रूप में योगदान नहीं है ? आज समय सभी जातियों के द्वारा खुले दिमाग से विचार करने का समय है!हम सभी इस मां भारती के लाडले सपूत हैं और छोटे-छोटे स्वार्थ हमको एक दूसरे से अलग नहीं कर सकते इसी भावना से कार्य करने की आवश्यकता है !
मेरा हरियाणा जिस की पावन धरा से स्वंम भगवान श्रीकृष्ण ने कर्म का संदेश सारी दुनिया को दिया हो वह इतना कमजोर नहीं कि वो चंद सत्ता की भूखी ताकतों के सामने असहाय हो करके अपना सामाजिक ताना बाना समाप्त कर ले ! भाई से भाई को लड़ाने का षड़यंत्र रचने वाली ताकतों को यह समझ लेना चाहिए की हरियाणा अन्याय ,षड्यंत्र व् अत्याचारों के खिलाफ हुए परास्त हुए लोगो के महाभारत के युद्ध की भी भूमि है!मुझे पूरा यकीन और विश्वास है कि सभी जातियों के लोग " हरियाणा एक हरियाणवी एक " का नारा मजबूत करते हुए पिछले दुखद वह भयानक घटनाओं और दृश्यों को पीछे छोड़ते हुए फिर से उठ खड़े होंगे !षड्यंत्रकारियों के चेहरों से नकाब हटेंगे, ऐसा मेरा दृढ़ विश्वास है !
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